श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

यमुनामनु यान्येव गंगामनु च भारत।

जगाम नैमिषं यत्र ऋषयः सत्रमासते॥ २०

yamunāmanu yānyeva gaṃgāmanu ca bhārata|

jagāma naimiṣaṃ yatra ṛṣayaḥ satramāsate|| 20

अर्थ

परीक्षित्! तदनन्तर यमुनातट और गंगातटके प्रधान-प्रधान तीर्थोंमें होते हुए वे नैमिषारण्य क्षेत्रमें गये। उन दिनों नैमिषारण्य क्षेत्रमें बड़े-बड़े ऋषि सत्संगरूप महान् सत्र कर रहे थे॥ २०॥

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