श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

गदामुद्यम्य कारूषो मुकुन्दं प्राह दुर्मदः।

दिष्ट्या दिष्ट्या भवानद्य मम दृष्टिपथं गतः॥ ४

gadāmudyamya kārūṣo mukundaṃ prāha durmadaḥ|

diṣṭyā diṣṭyā bhavānadya mama dṛṣṭipathaṃ gataḥ|| 4

अर्थ

घमंडके नशेमें चूर करूषनरेश दन्तवक्त्रने गदा तानकर भगवान् श्रीकृष्णसे कहा—‘बड़े सौभाग्य और आनन्दकी बात है कि आज तुम मेरी आँखोंके सामने पड़ गये॥ ४॥

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