॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.8.12
गर्ग उवाच
अयं हि रोहिणीपुत्रो रमयन् सुहृदो गुणैः।
आख्यास्यते राम इति बलाधिक्याद् बलं विदुः।
यदूनामपृथग्भावात् संकर्षणमुशन्त्युत॥ १२
ayaṃ hi rohiṇīputro ramayan suhṛdo guṇaiḥ|
ākhyāsyate rāma iti balādhikyād balaṃ viduḥ|
yadūnāmapṛthagbhāvāt saṃkarṣaṇamuśantyuta|| 12
अर्थ
गर्गाचार्यजीने कहा—‘यह रोहिणीका पुत्र है। इसलिये इसका नाम होगा रौहिणेय। यह अपने सगे-सम्बन्धी और मित्रोंको अपने गुणोंसे अत्यन्त आनन्दित करेगा। इसलिये इसका दूसरा नाम होगा ‘राम’। इसके बलकी कोई सीमा नहीं है, अतः इसका एक नाम ‘बल’ भी है। यह यादवोंमें और तुमलोगोंमें कोई भेदभाव नहीं रखेगा और लोगोंमें फूट पड़नेपर मेल करावेगा, इसलिये इसका एक नाम ‘संकर्षण’ भी है॥ १२॥