श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्रागयं वसुदेवस्य क्वचिज्जातस्तवात्मजः।

वासुदेव इति श्रीमानभिज्ञाः सम्प्रचक्षते॥ १४

prāgayaṃ vasudevasya kvacijjātastavātmajaḥ|

vāsudeva iti śrīmānabhijñāḥ sampracakṣate|| 14

अर्थ

नन्दजी! यह तुम्हारा पुत्र पहले कभी वसुदेवजीके घर भी पैदा हुआ था, इसलिये इस रहस्यको जाननेवाले लोग इसे ‘श्रीमान् वासुदेव’ भी कहते हैं॥ १४॥

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