सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! जब राजा परीक्षित्ने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान् श्रीशुकदेवजीका हृदय भगवान् श्रीकृष्णमें ही तल्लीन हो गया। उन्होंने परीक्षित्से इस प्रकार कहा॥ ५॥
विष्णुरातेन सम्पृष्टो भगवान् बादरायणिः।
वासुदेवे भगवति निमग्नहृदयोऽब्रवीत्॥ ५
सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! जब राजा परीक्षित्ने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान् श्रीशुकदेवजीका हृदय भगवान् श्रीकृष्णमें ही तल्लीन हो गया। उन्होंने परीक्षित्से इस प्रकार कहा॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 620) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/80/5/