इस प्रकार वे सोच ही रहे थे कि देवताओंके समान सुन्दर-सुन्दर स्त्री-पुरुष गाजे-बाजेके साथ मंगलगीत गाते हुए उस महाभाग्यवान् ब्राह्मणकी अगवानी करनेके लिये आये॥ २४॥
एवं मीमांसमानं तं नरा नार्योऽमरप्रभाः।
प्रत्यगृह्णन् महाभागं गीतवाद्येन भूयसा॥ २४
इस प्रकार वे सोच ही रहे थे कि देवताओंके समान सुन्दर-सुन्दर स्त्री-पुरुष गाजे-बाजेके साथ मंगलगीत गाते हुए उस महाभाग्यवान् ब्राह्मणकी अगवानी करनेके लिये आये॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 627) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/24/