brāhmaṇāḥ prabhavo daivaṃ na tebhyo vidyate param|| 39
अर्थ
प्रिय परीक्षित्! देवताओंके भी आराध्यदेव भक्त-भयहारी यज्ञपति सर्वशक्तिमान् भगवान् स्वयं ब्राह्मणोंको अपना प्रभु, अपना इष्टदेव मानते हैं। इसलिये ब्राह्मणोंसे बढ़कर और कोई भी प्राणी जगत्में नहीं है॥ ३९॥
तस्य वै देवदेवस्य हरेर्यज्ञपतेः प्रभोः।
ब्राह्मणाः प्रभवो दैवं न तेभ्यो विद्यते परम्॥ ३९
प्रिय परीक्षित्! देवताओंके भी आराध्यदेव भक्त-भयहारी यज्ञपति सर्वशक्तिमान् भगवान् स्वयं ब्राह्मणोंको अपना प्रभु, अपना इष्टदेव मानते हैं। इसलिये ब्राह्मणोंसे बढ़कर और कोई भी प्राणी जगत्में नहीं है॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 629) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/81/39/