श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

इत्थं विचिन्त्य वसनाच्चीरबद्धान्द्विजन्मनः।

स्वयं जहार किमिदमिति पृथुकतण्डुलान्॥ ८

itthaṃ vicintya vasanāccīrabaddhāndvijanmanaḥ|

svayaṃ jahāra kimidamiti pṛthukataṇḍulān|| 8

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा विचार करके उनके वस्त्रमेंसे चिथड़ेकी एक पोटलीमें बँधा हुआ चिउड़ा ‘यह क्या है’—ऐसा कहकर स्वयं ही छीन लिया॥ ८॥

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