वसुदेवजीने कहा—बहिन! उलाहना मत दो। हमसे बिलग न मानो। सभी मनुष्य दैवके खिलौने हैं। यह सम्पूर्ण लोक ईश्वरके वशमें रहकर कर्म करता है और उसका फल भोगता है॥ २१॥
अम्ब मास्मानसूयेथा दैवक्रीडनकान् नरान्।
ईशस्य हि वशे लोकः कुरुते कार्यतेऽथवा॥ २१
वसुदेवजीने कहा—बहिन! उलाहना मत दो। हमसे बिलग न मानो। सभी मनुष्य दैवके खिलौने हैं। यह सम्पूर्ण लोक ईश्वरके वशमें रहकर कर्म करता है और उसका फल भोगता है॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.82.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 632) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/82/21/