श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार गोपियोंको अध्यात्मज्ञानकी शिक्षासे शिक्षित किया। उसी उपदेशके बार-बार स्मरणसे गोपियोंका जीवकोश—लिंगशरीर नष्ट हो गया और वे भगवान्से एक हो गयीं, भगवान्को ही सदा-सर्वदाके लिये प्राप्त हो गयीं॥ ४८॥✎ 894
अध्यात्मशिक्षया गोप्य एवं कृष्णेन शिक्षिताः।
तदनुस्मरणध्वस्तजीवकोशास्तमध्यगन् ॥ ४८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार गोपियोंको अध्यात्मज्ञानकी शिक्षासे शिक्षित किया। उसी उपदेशके बार-बार स्मरणसे गोपियोंका जीवकोश—लिंगशरीर नष्ट हो गया और वे भगवान्से एक हो गयीं, भगवान्को ही सदा-सर्वदाके लिये प्राप्त हो गयीं॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.82.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 636) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/82/48/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)