भगवान् श्रीकृष्णके चरणकमलोंका दर्शन करनेसे ही उनके सारे अशुभ नष्ट हो चुके थे। अब जब भगवान् श्रीकृष्णने उनका सत्कार किया, कुशल-मंगल पूछा, तब वे अत्यन्त आनन्दित होकर उनसे कहने लगे—॥ २॥✎ 1440
त एवं लोकनाथेन परिपृष्टाः सुसत्कृताः।
प्रत्यूचुर्हृष्टमनसस्तत्पादेक्षाहतांहसः ॥ २
भगवान् श्रीकृष्णके चरणकमलोंका दर्शन करनेसे ही उनके सारे अशुभ नष्ट हो चुके थे। अब जब भगवान् श्रीकृष्णने उनका सत्कार किया, कुशल-मंगल पूछा, तब वे अत्यन्त आनन्दित होकर उनसे कहने लगे—॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 637) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/83/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)