उनमेंसे कुछ राजाओंने धनुष लेकर युद्धके लिये सज-धजकर इस उद्देश्यसे रास्तेमें पीछा किया कि हम भगवान्को रोक लें; परन्तु रानीजी! उनकी चेष्टा ठीक वैसी ही थी, जैसे कुत्ते सिंहको रोकना चाहें॥ ३४॥
तेऽन्वसज्जन्त राजन्या निषेद्धु पथि केचन।
संयत्ता उद्धृतेष्वासा ग्रामसिंहा यथा हरिम्॥ ३४
उनमेंसे कुछ राजाओंने धनुष लेकर युद्धके लिये सज-धजकर इस उद्देश्यसे रास्तेमें पीछा किया कि हम भगवान्को रोक लें; परन्तु रानीजी! उनकी चेष्टा ठीक वैसी ही थी, जैसे कुत्ते सिंहको रोकना चाहें॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 641) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/83/34/