te śārṅgacyutabāṇaughaiḥ kṛttabāhvaṅghrikandharāḥ|
nipetuḥ pradhane kecideke santyajya dudruvuḥ|| 35
अर्थ
शार्ङ्गधनुषके छूटे हुए तीरोंसे किसीकी बाँह कट गयी तो किसीके पैर कटे और किसीकी गर्दन ही उतर गयी। बहुत-से लोग तो उस रणभूमिमें ही सदाके लिये सो गये और बहुत-से युद्धभूमि छोड़कर भाग खड़े हुए॥ ३५॥
ते शार्ङ्गच्युतबाणौघैः कृत्तबाह्वङ्घ्रिकन्धराः।
निपेतुः प्रधने केचिदेके सन्त्यज्य दुद्रुवुः॥ ३५
शार्ङ्गधनुषके छूटे हुए तीरोंसे किसीकी बाँह कट गयी तो किसीके पैर कटे और किसीकी गर्दन ही उतर गयी। बहुत-से लोग तो उस रणभूमिमें ही सदाके लिये सो गये और बहुत-से युद्धभूमि छोड़कर भाग खड़े हुए॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 642) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/83/35/