श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.83.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 83 · अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः

ते शार्ङ्गच्युतबाणौघैः कृत्तबाह्वङ्‌घ्रिकन्धराः।

निपेतुः प्रधने केचिदेके सन्त्यज्य दुद्रुवुः॥ ३५

te śārṅgacyutabāṇaughaiḥ kṛttabāhvaṅghrikandharāḥ|

nipetuḥ pradhane kecideke santyajya dudruvuḥ|| 35

अर्थ

शार्ङ्गधनुषके छूटे हुए तीरोंसे किसीकी बाँह कट गयी तो किसीके पैर कटे और किसीकी गर्दन ही उतर गयी। बहुत-से लोग तो उस रणभूमिमें ही सदाके लिये सो गये और बहुत-से युद्धभूमि छोड़कर भाग खड़े हुए॥ ३५॥

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