॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.84.21
अद्य नो जन्मसाफल्यं विद्यायास्तपसो दृशः।
त्वया संगम्य सद्गत्या यदन्तः श्रेयसां परः॥ २१
adya no janmasāphalyaṃ vidyāyāstapaso dṛśaḥ|
tvayā saṃgamya sadgatyā yadantaḥ śreyasāṃ paraḥ|| 21
अर्थ
आप सर्वविध कल्याण-साधनोंकी चरमसीमा हैं और संत पुरुषोंकी एकमात्र गति हैं। आपसे मिलकर आज हमारे जन्म, विद्या, तप और ज्ञान सफल हो गये। वास्तवमें सबके परम फल आप ही हैं॥ २१॥