॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.84.22
नमस्तस्मै भगवते कृष्णायाकुण्ठमेधसे।
स्वयोगमाययाच्छन्नमहिम्ने परमात्मने॥ २२
namastasmai bhagavate kṛṣṇāyākuṇṭhamedhase|
svayogamāyayācchannamahimne paramātmane|| 22
अर्थ
प्रभो! आपका ज्ञान अनन्त है, आप स्वयं सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्म परमात्मा भगवान् हैं। आपने अपनी अचिन्त्य शक्ति योगमायाके द्वारा अपनी महिमा छिपा रखी है, हम आपको नमस्कार करते हैं॥ २२॥