संसारमें बहुत पास रहना मनुष्योंके अनादरका कारण हुआ करता है। देखते हैं, गंगातटपर रहनेवाला पुरुष गंगाजल छोड़कर अपनी शुद्धिके लिये दूसरे तीर्थमें जाता है॥ ३१॥
सन्निकर्षो हि मर्त्यानामनादरणकारणम्।
गाङ्गं हित्वा यथान्याम्भस्तत्रत्यो याति शुद्धये॥ ३१
संसारमें बहुत पास रहना मनुष्योंके अनादरका कारण हुआ करता है। देखते हैं, गंगातटपर रहनेवाला पुरुष गंगाजल छोड़कर अपनी शुद्धिके लिये दूसरे तीर्थमें जाता है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 647) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/84/31/