श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

चित्तस्योपशमोऽयं वै कविभिः शास्त्रचक्षुषा।

दर्शितः सुगमो योगो धर्मश्‍चात्ममुदावहः॥ ३६

cittasyopaśamo'yaṃ vai kavibhiḥ śāstracakṣuṣā|

darśitaḥ sugamo yogo dharmaścātmamudāvahaḥ|| 36

अर्थ

त्रिकालदर्शी ज्ञानियोंने शास्त्रदृष्टिसे यही चित्तकी शान्तिका उपाय, सुगम मोक्षसाधन और चित्तमें आनन्दका उल्लास करनेवाला धर्म बतलाया है॥ ३६॥

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