श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.52

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

अथर्त्विग्भ्योऽददात् काले यथाम्‍नातं स दक्षिणाः।

स्वलंकृतेभ्योऽलंकृत्य गोभूकन्या महाधनाः॥ ५२

athartvigbhyo'dadāt kāle yathāmnātaṃ sa dakṣiṇāḥ|

svalaṃkṛtebhyo'laṃkṛtya gobhūkanyā mahādhanāḥ|| 52

अर्थ

इसके बाद उन्होंने उचित समयपर ऋत्विजोंको वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित किया और शास्त्रके अनुसार बहुत-सी दक्षिणा तथा प्रचुर धनके साथ अलंकृत गौएँ, पृथ्वी और सुन्दरी कन्याएँ दीं॥ ५२॥✎ 1717

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1717 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: विष्णु-भगवान्‌की → विष्णुभगवान्‌की

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