adhunā śrīmadāndhākṣā na paśyāmaḥ puraḥ sataḥ|| 63
अर्थ
भाईजी! पहले तो बंदीगृहमें बंद होनेके कारण हम आपका कुछ भी प्रिय और हित न कर सके। अब हमारी यह दशा हो रही है कि हम धन-सम्पत्तिके नशेसे—श्रीमदसे अंधे हो रहे हैं; आप हमारे सामने हैं तो भी हम आपकी ओर नहीं देख पाते॥ ६३॥
प्रागकल्पाच्च कुशलं भ्रातर्वो नाचराम हि।
अधुना श्रीमदान्धाक्षा न पश्यामः पुरः सतः॥ ६३
भाईजी! पहले तो बंदीगृहमें बंद होनेके कारण हम आपका कुछ भी प्रिय और हित न कर सके। अब हमारी यह दशा हो रही है कि हम धन-सम्पत्तिके नशेसे—श्रीमदसे अंधे हो रहे हैं; आप हमारे सामने हैं तो भी हम आपकी ओर नहीं देख पाते॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 651) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/84/63/