श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.67

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

ततः कामैः पूर्यमाणः सव्रजः सहबान्धवः।

परार्घ्याभरणक्षौमनानानर्घ्यपरिच्छदैः ॥ ६७

tataḥ kāmaiḥ pūryamāṇaḥ savrajaḥ sahabāndhavaḥ|

parārghyābharaṇakṣaumanānānarghyaparicchadaiḥ || 67

अर्थ

इसके बाद बहुमूल्य आभूषण, रेशमी वस्त्र, नाना प्रकारकी उत्तमोत्तम सामग्रियों और भोगोंसे नन्दबाबाको, उनके व्रजवासी साथियोंको और बन्धु-बान्धवोंको खूब तृप्त किया॥ ६७॥

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