॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.84.68
वसुदेवोग्रसेनाभ्यां कृष्णोद्धवबलादिभिः।
दत्तमादाय पारिबर्हं यापितो यदुभिर्ययौ॥ ६८
vasudevograsenābhyāṃ kṛṣṇoddhavabalādibhiḥ|
dattamādāya pāribarhaṃ yāpito yadubhiryayau|| 68
अर्थ
वसुदेवजी, उग्रसेन, श्रीकृष्ण, बलराम, उद्धव आदि यदुवंशियोंने अलग-अलग उन्हें अनेकों प्रकारकी भेंटें दीं। उनके विदा करनेपर उन सब सामग्रियोंको लेकर नन्दबाबा, अपने व्रजके लिये रवाना हुए॥ ६८॥