॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.84.7
तानानर्चुर्यथा सर्वे सहरामोऽच्युतोऽर्चयत्।
स्वागतासनपाद्यार्घ्यमाल्यधूपानुलेपनैः ॥ ७
tānānarcuryathā sarve saharāmo'cyuto'rcayat|
svāgatāsanapādyārghyamālyadhūpānulepanaiḥ || 7
अर्थ
इसके बाद स्वागत, आसन, पाद्य, अर्घ्य, पुष्पमाला, धूप और चन्दन आदिसे सब राजाओंने तथा बलरामजीके साथ स्वयं भगवान् श्रीकृष्णने उन सब ऋषियोंकी विधिपूर्वक पूजा की॥ ७॥ जब सब ऋषि-मुनि आरामसे बैठ गये, तब धर्मरक्षाके लिये अवतीर्ण भगवान् श्रीकृष्णने उनसे कहा। उस समय वह बहुत बड़ी सभा चुपचाप भगवान्का भाषण सुन रही थी॥ ८॥