श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

उवाच सुखमासीनान् भगवान् धर्मगुप्तनुः।

सदसस्तस्य महतो यतवाचोऽनुशृण्वतः॥ ८

uvāca sukhamāsīnān bhagavān dharmaguptanuḥ|

sadasastasya mahato yatavāco'nuśṛṇvataḥ|| 8

अर्थ

जब सब ऋषि-मुनि आरामसे बैठ गये, तब धर्मरक्षाके लिये अवतीर्ण भगवान् श्रीकृष्णने उनसे कहा। उस समय वह बहुत बड़ी सभा चुपचाप भगवान्‌का भाषण सुन रही थी॥ ८॥

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