जब सब ऋषि-मुनि आरामसे बैठ गये, तब धर्मरक्षाके लिये अवतीर्ण भगवान् श्रीकृष्णने उनसे कहा। उस समय वह बहुत बड़ी सभा चुपचाप भगवान्का भाषण सुन रही थी॥ ८॥
उवाच सुखमासीनान् भगवान् धर्मगुप्तनुः।
सदसस्तस्य महतो यतवाचोऽनुशृण्वतः॥ ८
जब सब ऋषि-मुनि आरामसे बैठ गये, तब धर्मरक्षाके लिये अवतीर्ण भगवान् श्रीकृष्णने उनसे कहा। उस समय वह बहुत बड़ी सभा चुपचाप भगवान्का भाषण सुन रही थी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 644) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/84/8/