देवकीजीने कहा—लोकाभिराम राम! तुम्हारी शक्ति मन और वाणीके परे है। श्रीकृष्ण! तुम योगेश्वरोंके भी ईश्वर हो। मैं जानती हूँ कि तुम दोनों प्रजापतियोंके भी ईश्वर, आदिपुरुष नारायण हो॥ २९॥✎ 1910
राम रामाप्रमेयात्मन् कृष्ण योगेश्वरेश्वर।
वेदाहं वां विश्वसृजामीश्वरावादिपूरुषौ॥ २९
देवकीजीने कहा—लोकाभिराम राम! तुम्हारी शक्ति मन और वाणीके परे है। श्रीकृष्ण! तुम योगेश्वरोंके भी ईश्वर हो। मैं जानती हूँ कि तुम दोनों प्रजापतियोंके भी ईश्वर, आदिपुरुष नारायण हो॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 656) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/85/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1910 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): निश्चत → निश्चित