॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.85.30
कालविध्वस्तसत्त्वानां राज्ञामुच्छास्त्रवर्तिनाम्।
भूमेर्भारायमाणानामवतीर्णौ किलाद्य मे॥ ३०
kālavidhvastasattvānāṃ rājñāmucchāstravartinām|
bhūmerbhārāyamāṇānāmavatīrṇau kilādya me|| 30
अर्थ
यह भी मुझे निश्चित रूपसे मालूम है कि जिन लोगोंने कालक्रमसे अपना धैर्य, संयम और सत्त्वगुण खो दिया है तथा शास्त्रकी आज्ञाओंका उल्लंघन करके जो स्वेच्छाचारपरायण हो रहे हैं, भूमिके भारभूत उन राजाओंका नाश करनेके लिये ही तुम दोनों मेरे गर्भसे अवतीर्ण हुए हो॥ ३०॥✎ 1910