‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! महायोगीश्वर संकर्षण! तुम दोनों सनातन हो। मैं जानता हूँ कि तुम दोनों सारे जगत्के साक्षात् कारणस्वरूप प्रधान और पुरुषके भी नियामक परमेश्वर हो॥ ३॥
कृष्ण कृष्ण महायोगिन् संकर्षण सनातन।
जाने वामस्य यत् साक्षात् प्रधानपुरुषौ परौ॥ ३
‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! महायोगीश्वर संकर्षण! तुम दोनों सनातन हो। मैं जानता हूँ कि तुम दोनों सारे जगत्के साक्षात् कारणस्वरूप प्रधान और पुरुषके भी नियामक परमेश्वर हो॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 652) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/85/3/