श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

बलिरुवाच

नमोऽनन्ताय बृहते नमः कृष्णाय वेधसे।

सांख्ययोगवितानाय ब्रह्मणे परमात्मने॥ ३९

namo'nantāya bṛhate namaḥ kṛṣṇāya vedhase|

sāṃkhyayogavitānāya brahmaṇe paramātmane|| 39

अर्थ

दैत्यराज बलिने कहा—बलरामजी! आप अनन्त हैं। आप इतने महान् हैं कि शेष आदि सभी विग्रह आपके अन्तर्भूत हैं। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आप सकल जगत‍्के निर्माता हैं। ज्ञानयोग और भक्तियोग दोनोंके प्रवर्तक आप ही हैं। आप स्वयं ही परब्रह्म परमात्मा हैं। हम आप दोनोंको बार-बार नमस्कार करते हैं॥ ३९॥

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