॥ श्रीहरिः ॥
देवं स वव्रे पापीयान् वरं भूतभयावहम्।
यस्य यस्य करं शीर्ष्णि धास्ये स म्रियतामिति॥ २१
devaṃ sa vavre pāpīyān varaṃ bhūtabhayāvaham|
yasya yasya karaṃ śīrṣṇi dhāsye sa mriyatāmiti|| 21
अर्थ
परीक्षित्! अत्यन्त पापी वृकासुरने समस्त प्राणियोंको भयभीत करनेवाला यह वर माँगा कि ‘मैं जिसके सिरपर हाथ रख दूँ, वही मर जाय’॥ २१॥
देवं स वव्रे पापीयान् वरं भूतभयावहम्।
यस्य यस्य करं शीर्ष्णि धास्ये स म्रियतामिति॥ २१
परीक्षित्! अत्यन्त पापी वृकासुरने समस्त प्राणियोंको भयभीत करनेवाला यह वर माँगा कि ‘मैं जिसके सिरपर हाथ रख दूँ, वही मर जाय’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 690) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/88/21/