वह उनका पीछा करने लगा और वे उससे डरकर काँपते हुए भागने लगे। वे पृथ्वी, स्वर्ग और दिशाओंके अन्ततक दौड़ते गये; परन्तु फिर भी उसे पीछा करते देखकर उत्तरकी ओर बढ़े॥ २४॥✎ 1723
तेनोपसृष्टः संत्रस्तः पराधावन् सवेपथुः।
यावदन्तं दिवो भूमेः काष्ठानामुदगादुदक्॥ २४
वह उनका पीछा करने लगा और वे उससे डरकर काँपते हुए भागने लगे। वे पृथ्वी, स्वर्ग और दिशाओंके अन्ततक दौड़ते गये; परन्तु फिर भी उसे पीछा करते देखकर उत्तरकी ओर बढ़े॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 691) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/88/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)