श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

अजानन्तः प्रतिविधिं तूष्णीमासन् सुरेश्‍वराः।

ततो वैकुण्ठमगमद् भास्वरं तमसः परम्॥ २५

ajānantaḥ pratividhiṃ tūṣṇīmāsan sureśvarāḥ|

tato vaikuṇṭhamagamad bhāsvaraṃ tamasaḥ param|| 25

अर्थ

बड़े-बड़े देवता इस संकटको टालनेका कोई उपाय न देखकर चुप रह गये। अन्तमें वे प्राकृतिक अंधकारसे परे परम प्रकाशमय वैकुण्ठलोकमें गये॥ २५॥✎ 1723

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1723 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वैकुण्ठ-लोकमें → वैकुण्ठलोकमें

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