tato vaikuṇṭhamagamad bhāsvaraṃ tamasaḥ param|| 25
अर्थ
बड़े-बड़े देवता इस संकटको टालनेका कोई उपाय न देखकर चुप रह गये। अन्तमें वे प्राकृतिक अंधकारसे परे परम प्रकाशमय वैकुण्ठलोकमें गये॥ २५॥✎ 1723
अजानन्तः प्रतिविधिं तूष्णीमासन् सुरेश्वराः।
ततो वैकुण्ठमगमद् भास्वरं तमसः परम्॥ २५
बड़े-बड़े देवता इस संकटको टालनेका कोई उपाय न देखकर चुप रह गये। अन्तमें वे प्राकृतिक अंधकारसे परे परम प्रकाशमय वैकुण्ठलोकमें गये॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 691) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)