tadainaṃ jahyasadvācaṃ na yad vaktānṛtaṃ punaḥ|| 34
अर्थ
दानव-शिरोमणे! यदि किसी प्रकार शंकरकी बात असत्य निकले तो उस असत्यवादीको मार डालिये, जिससे फिर कभी वह झूठ न बोल सके॥ ३४॥
यद्यसत्यं वचः शम्भोः कथंचिद् दानवर्षभ।
तदैनं जह्यसद्वाचं न यद् वक्तानृतं पुनः॥ ३४
दानव-शिरोमणे! यदि किसी प्रकार शंकरकी बात असत्य निकले तो उस असत्यवादीको मार डालिये, जिससे फिर कभी वह झूठ न बोल सके॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 692) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/88/34/