श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

निवृत्तेष्वश्‍वमेधेषु राजा युष्मत्पितामहः।

शृण्वन् भगवतो धर्मानपृच्छदिदमच्युतम्॥ ६

nivṛtteṣvaśvamedheṣu rājā yuṣmatpitāmahaḥ|

śṛṇvan bhagavato dharmānapṛcchadidamacyutam|| 6

अर्थ

परीक्षित्! जब तुम्हारे दादा धर्मराज युधिष्ठिर अश्‍वमेध यज्ञ कर चुके, तब भगवान्‌से विविध प्रकारके धर्मोंका वर्णन सुनते समय उन्होंने भी यही प्रश्‍न किया था॥ ६॥✎ 896

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #896 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें