परीक्षित्! जब तुम्हारे दादा धर्मराज युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ कर चुके, तब भगवान्से विविध प्रकारके धर्मोंका वर्णन सुनते समय उन्होंने भी यही प्रश्न किया था॥ ६॥✎ 896
निवृत्तेष्वश्वमेधेषु राजा युष्मत्पितामहः।
शृण्वन् भगवतो धर्मानपृच्छदिदमच्युतम्॥ ६
परीक्षित्! जब तुम्हारे दादा धर्मराज युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ कर चुके, तब भगवान्से विविध प्रकारके धर्मोंका वर्णन सुनते समय उन्होंने भी यही प्रश्न किया था॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 688) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)