श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

स आह भगवांस्तस्मै प्रीतः शुश्रूषवे प्रभुः।

नृणां निःश्रेयसार्थाय योऽवतीर्णो यदोः कुले॥ ७

sa āha bhagavāṃstasmai prītaḥ śuśrūṣave prabhuḥ|

nṛṇāṃ niḥśreyasārthāya yo'vatīrṇo yadoḥ kule|| 7

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान् परमेश्‍वर हैं। मनुष्योंके कल्याणके लिये ही उन्होंने यदुवंशमें अवतार धारण किया था। राजा युधिष्ठिरका प्रश्‍न सुनकर और उनकी सुननेकी इच्छा देखकर उन्होंने प्रसन्‍नतापूर्वक इस प्रकार उत्तर दिया था॥ ७॥✎ 896

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #896 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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