॥ श्रीहरिः ॥
सप्त द्वीपान् सप्त सिन्धून् सप्तसप्तगिरीनथ।
लोकालोकं तथातीत्य विवेश सुमहत्तमः॥ ४८
sapta dvīpān sapta sindhūn saptasaptagirīnatha|
lokālokaṃ tathātītya viveśa sumahattamaḥ|| 48
अर्थ
उन्होंने सात-सात पर्वतोंवाले सात द्वीप, सात समुद्र और लोकालोक-पर्वतको लाँघकर घोर अन्धकारमें प्रवेश किया॥ ४८॥
सप्त द्वीपान् सप्त सिन्धून् सप्तसप्तगिरीनथ।
लोकालोकं तथातीत्य विवेश सुमहत्तमः॥ ४८
उन्होंने सात-सात पर्वतोंवाले सात द्वीप, सात समुद्र और लोकालोक-पर्वतको लाँघकर घोर अन्धकारमें प्रवेश किया॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 698) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/89/48/