॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.89.49
तत्राश्वाः शैब्यसुग्रीवमेघपुष्पबलाहकाः।
तमसि भ्रष्टगतयो बभूवुर्भरतर्षभ॥ ४९
tatrāśvāḥ śaibyasugrīvameghapuṣpabalāhakāḥ|
tamasi bhraṣṭagatayo babhūvurbharatarṣabha|| 49
अर्थ
परीक्षित्! वह अन्धकार इतना घोर था कि उसमें शैब्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक नामके चारों घोड़े अपना मार्ग भूलकर इधर-उधर भटकने लगे। उन्हें कुछ सूझता ही न था॥ ४९॥ योगेश्वरोंके भी परमेश्वर भगवान् श्रीकृष्णने घोड़ोंकी यह दशा देखकर अपने सहस्र-सहस्र सूर्योंके समान तेजस्वी चक्रको आगे चलनेकी आज्ञा दी॥ ५०॥