श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.64

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

इतीदृशान्यनेकानि वीर्याणीह प्रदर्शयन्।

बुभुजे विषयान् ग्राम्यानीजे चात्यूर्जितैर्मखैः॥ ६४

itīdṛśānyanekāni vīryāṇīha pradarśayan|

bubhuje viṣayān grāmyānīje cātyūrjitairmakhaiḥ|| 64

अर्थ

परीक्षित्! भगवान्‌ने और भी ऐसी अनेकों ऐश्‍वर्य और वीरतासे परिपूर्ण लीलाएँ कीं। लोकदृष्टिमें साधारण लोगोंके समान सांसारिक विषयोंका भोग किया और बड़े-बड़े महाराजाओंके समान श्रेष्ठ-श्रेष्ठ यज्ञ किये॥ ६४॥

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