श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.9.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

पुरा नारदशापेन वृक्षतां प्रापितौ मदात्।

नलकूबरमणिग्रीवाविति ख्यातौ श्रियान्वितौ॥ २३

purā nāradaśāpena vṛkṣatāṃ prāpitau madāt|

nalakūbaramaṇigrīvāviti khyātau śriyānvitau|| 23

अर्थ

इनके नाम थे नलकूबर और मणिग्रीव। इनके पास धन, सौन्दर्य और ऐश्‍वर्यकी पूर्णता थी। इनका घमण्ड देखकर ही देवर्षि नारदजीने इन्हें शाप दे दिया था और ये वृक्ष हो गये थे*॥ २३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे
गोपीप्रसादो नाम नवमोऽध्यायः॥ ९॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    ये अपने भक्त कुबेरके पुत्र हैं, इसलिये इनका अर्जुन नाम है। ये देवर्षि नारदके द्वारा दृष्टिपूत किये जा चुके हैं, इसलिये भगवान्‌ने उनकी ओर देखा।

    जिसे पहले भक्तिकी प्राप्ति हो जाती है, उसपर कृपा करनेके लिये स्वयं बँधकर भी भगवान् जाते हैं।

    (मुद्रित पृष्ठ 189)

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