मलयानिल! हमने तेरा क्या बिगाड़ा है, जो तू हमारे हृदयमें कामका संचार कर रहा है? अरे तू नहीं जानता क्या? भगवान्की तिरछी चितवनसे हमारा हृदय तो पहलेसे ही घायल हो गया है॥ १९॥
किं त्वाचरितमस्माभिर्मलयानिल तेऽप्रियम्।
गोविन्दापांगनिर्भिन्ने हृदीरयसि नः स्मरम्॥ १९
मलयानिल! हमने तेरा क्या बिगाड़ा है, जो तू हमारे हृदयमें कामका संचार कर रहा है? अरे तू नहीं जानता क्या? भगवान्की तिरछी चितवनसे हमारा हृदय तो पहलेसे ही घायल हो गया है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 704) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/19/