श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

किं त्वाचरितमस्माभिर्मलयानिल तेऽप्रियम्।

गोविन्दापांगनिर्भिन्‍ने हृदीरयसि नः स्मरम्॥ १९

kiṃ tvācaritamasmābhirmalayānila te'priyam|

govindāpāṃganirbhinne hṛdīrayasi naḥ smaram|| 19

अर्थ

मलयानिल! हमने तेरा क्या बिगाड़ा है, जो तू हमारे हृदयमें कामका संचार कर रहा है? अरे तू नहीं जानता क्या? भगवान्‌की तिरछी चितवनसे हमारा हृदय तो पहलेसे ही घायल हो गया है॥ १९॥

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