श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

स चापि रुक्मिणः पौत्रीं दौहित्रो जगृहे ततः।

वज्रस्तस्याभवद् यस्तु मौसलादवशेषितः॥ ३७

sa cāpi rukmiṇaḥ pautrīṃ dauhitro jagṛhe tataḥ|

vajrastasyābhavad yastu mausalādavaśeṣitaḥ|| 37

अर्थ

रुक्मीके दौहित्र अनिरुद्धजीने अपने नानाकी पोतीसे विवाह किया। उसके गर्भसे वज्रका जन्म हुआ। ब्राह्मणोंके शापसे पैदा हुए मूसलके द्वारा यदुवंशका नाश हो जानेपर एकमात्र वे ही बच रहे थे॥ ३७॥

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