श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

यदि प्राप्तिं विघातं च जानन्ति सुखदुःखयोः।

तेऽप्यद्धा न विदुर्योगं मृत्युर्न प्रभवेद् यथा॥ १९

yadi prāptiṃ vighātaṃ ca jānanti sukhaduḥkhayoḥ|

te'pyaddhā na viduryogaṃ mṛtyurna prabhaved yathā|| 19

अर्थ

यदि यह स्वीकार कर लिया जाय कि वे लोग सुखकी प्राप्ति और दुःखके नाशका ठीक-ठीक उपाय जानते हैं, तो भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि उन्हें भी ऐसे उपायका पता नहीं है, जिससे मृत्यु उनके ऊपर कोई प्रभाव न डाल सके और वे कभी मरें ही नहीं॥ १९॥

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