॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.10.19
यदि प्राप्तिं विघातं च जानन्ति सुखदुःखयोः।
तेऽप्यद्धा न विदुर्योगं मृत्युर्न प्रभवेद् यथा॥ १९
yadi prāptiṃ vighātaṃ ca jānanti sukhaduḥkhayoḥ|
te'pyaddhā na viduryogaṃ mṛtyurna prabhaved yathā|| 19
अर्थ
यदि यह स्वीकार कर लिया जाय कि वे लोग सुखकी प्राप्ति और दुःखके नाशका ठीक-ठीक उपाय जानते हैं, तो भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि उन्हें भी ऐसे उपायका पता नहीं है, जिससे मृत्यु उनके ऊपर कोई प्रभाव न डाल सके और वे कभी मरें ही नहीं॥ १९॥