भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं—प्रिय उद्धव! यद्यपि ब्रह्माजी सब देवताओंके शिरोमणि, स्वयम्भू और प्राणियोंके जन्मदाता हैं। फिर भी सनकादि परमर्षियोंके इस प्रकार पूछनेपर ध्यान करके भी वे इस प्रश्नका मूल कारण न समझ सके; क्योंकि उनकी बुद्धि कर्मप्रवण थी॥ १८॥
एवं पृष्टो महादेवः स्वयंभूर्भूतभावनः।
ध्यायमानः प्रश्नबीजं नाभ्यपद्यत कर्मधीः॥ १८
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं—प्रिय उद्धव! यद्यपि ब्रह्माजी सब देवताओंके शिरोमणि, स्वयम्भू और प्राणियोंके जन्मदाता हैं। फिर भी सनकादि परमर्षियोंके इस प्रकार पूछनेपर ध्यान करके भी वे इस प्रश्नका मूल कारण न समझ सके; क्योंकि उनकी बुद्धि कर्मप्रवण थी॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.13.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 794) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/13/18/