श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.18

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

एवं पृष्टो महादेवः स्वयंभूर्भूतभावनः।

ध्यायमानः प्रश्‍नबीजं नाभ्यपद्यत कर्मधीः॥ १८

evaṃ pṛṣṭo mahādevaḥ svayaṃbhūrbhūtabhāvanaḥ|

dhyāyamānaḥ praśnabījaṃ nābhyapadyata karmadhīḥ|| 18

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं—प्रिय उद्धव! यद्यपि ब्रह्माजी सब देवताओंके शिरोमणि, स्वयम्भू और प्राणियोंके जन्मदाता हैं। फिर भी सनकादि परमर्षियोंके इस प्रकार पूछनेपर ध्यान करके भी वे इस प्रश्‍नका मूल कारण न समझ सके; क्योंकि उनकी बुद्धि कर्मप्रवण थी॥ १८॥

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