उद्धव! उस समय ब्रह्माजीने इस प्रश्नका उत्तर देनेके लिये भक्तिभावसे मेरा चिन्तन किया। तब मैं हंसका रूप धारण करके उनके सामने प्रकट हुआ॥ १९॥
स मामचिन्तयद् देवः प्रश्नपारतितीर्षया।
तस्याहं हंसरूपेण सकाशमगमं तदा॥ १९
उद्धव! उस समय ब्रह्माजीने इस प्रश्नका उत्तर देनेके लिये भक्तिभावसे मेरा चिन्तन किया। तब मैं हंसका रूप धारण करके उनके सामने प्रकट हुआ॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.13.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 794) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/13/19/