श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.29

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

स्त्रीणां स्त्रीसंगिनां संगं त्यक्त्वा दूरत आत्मवान्।

क्षेमे विविक्त आसीनश्‍चिन्तयेन्मामतन्द्रितः॥ २९

strīṇāṃ strīsaṃgināṃ saṃgaṃ tyaktvā dūrata ātmavān|

kṣeme vivikta āsīnaścintayenmāmatandritaḥ|| 29

अर्थ

संयमी पुरुष स्त्रियों और उनके प्रेमियोंका संग दूरसे ही छोड़कर, पवित्र एकान्त स्थानमें बैठकर बड़ी सावधानीसे मेरा ही चिन्तन करे॥ २९॥

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