प्यारे उद्धव! स्त्रियोंके संगसे और स्त्रीसंगियोंके—लम्पटोंके संगसे पुरुषको जैसे क्लेश और बन्धनमें पड़ना पड़ता है, वैसा क्लेश और फँसावट और किसीके भी संगसे नहीं होती॥ ३०॥
न तथास्य भवेत् क्लेशो बन्धश्चान्यप्रसंगतः।
योषित्संगाद् यथा पुंसो यथा तत्संगिसंगतः॥ ३०
प्यारे उद्धव! स्त्रियोंके संगसे और स्त्रीसंगियोंके—लम्पटोंके संगसे पुरुषको जैसे क्लेश और बन्धनमें पड़ना पड़ता है, वैसा क्लेश और फँसावट और किसीके भी संगसे नहीं होती॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.14.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 802) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/14/30/