जो योगी वायु आदि चार भूतोंके परमाणुओंको मेरा ही रूप समझकर चित्तको तदाकार कर देता है, उसे ‘लघिमा’ सिद्धि प्राप्त हो जाती है—उसे परमाणुरूप कालके* समान सूक्ष्म वस्तु बननेका सामर्थ्य प्राप्त हो जाता है॥ १२॥
परमाणुमये चित्तं भूतानां मयि रंजयन्।
कालसूक्ष्मार्थतां योगी लघिमानमवाप्नुयात्॥ १२
जो योगी वायु आदि चार भूतोंके परमाणुओंको मेरा ही रूप समझकर चित्तको तदाकार कर देता है, उसे ‘लघिमा’ सिद्धि प्राप्त हो जाती है—उसे परमाणुरूप कालके समान सूक्ष्म वस्तु बननेका सामर्थ्य प्राप्त हो जाता है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.15.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 806) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/15/12/
टिप्पणियाँ
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पृथ्वी आदिके परमाणुओंमें गुरुत्व विद्यमान रहता है। इसीसे उसका भी निषेध करनेके लिये कालके परमाणुकी समानता बतायी है।