॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.15.28
मद्भक्त्या शुद्धसत्त्वस्य योगिनो धारणाविदः।
तस्य त्रैकालिकी बुद्धिर्जन्ममृत्यूपबृंहिता॥ २८
madbhaktyā śuddhasattvasya yogino dhāraṇāvidaḥ|
tasya traikālikī buddhirjanmamṛtyūpabṛṃhitā|| 28
अर्थ
जिस योगीका चित्त मेरी धारणा करते-करते मेरी भक्तिके प्रभावसे शुद्ध हो गया है, उसकी बुद्धि जन्म-मृत्यु आदि अदृष्ट विषयोंको भी जान लेती है। और तो क्या—भूत, भविष्य और वर्तमानकी सभी बातें उसे मालूम हो जाती हैं॥ २८॥