श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.15.30

एकादश स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

मद्विभूतीरभिध्यायन् श्रीवत्सास्त्रविभूषिताः।

ध्वजातपत्रव्यजनैः स भवेदपराजितः॥ ३०

madvibhūtīrabhidhyāyan śrīvatsāstravibhūṣitāḥ|

dhvajātapatravyajanaiḥ sa bhavedaparājitaḥ|| 30

अर्थ

जो पुरुष श्रीवत्स आदि चिह्न और शंख-गदा-चक्र-पद्म आदि आयुधोंसे विभूषित तथा ध्वजा-छत्र-चँवर आदिसे सम्पन्‍न मेरे अवतारोंका ध्यान करता है, वह अजेय हो जाता है॥ ३०॥

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