श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.15.9

एकादश स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

एताश्‍चोद्देशतः प्रोक्ता योगधारणसिद्धयः।

यया धारणया या स्याद् यथा वा स्यान्‍निबोध मे॥ ९

etāścoddeśataḥ proktā yogadhāraṇasiddhayaḥ|

yayā dhāraṇayā yā syād yathā vā syānnibodha me|| 9

अर्थ

प्रिय उद्धव! योग-धारणा करनेसे जो सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, उनका मैंने नाम-निर्देशके साथ वर्णन कर दिया। अब किस धारणासे कौन-सी सिद्धि कैसे प्राप्त होती है, यह बतलाता हूँ, सुनो॥ ९॥

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