॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.15.9
एताश्चोद्देशतः प्रोक्ता योगधारणसिद्धयः।
यया धारणया या स्याद् यथा वा स्यान्निबोध मे॥ ९
etāścoddeśataḥ proktā yogadhāraṇasiddhayaḥ|
yayā dhāraṇayā yā syād yathā vā syānnibodha me|| 9
अर्थ
प्रिय उद्धव! योग-धारणा करनेसे जो सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, उनका मैंने नाम-निर्देशके साथ वर्णन कर दिया। अब किस धारणासे कौन-सी सिद्धि कैसे प्राप्त होती है, यह बतलाता हूँ, सुनो॥ ९॥