आठ प्रकारके योगोंमें मैं मनोनिरोधरूप समाधि हूँ। विजयके इच्छुकोंमें रहनेवाला मैं मन्त्र (नीति) बल हूँ, कौशलोंमें आत्मा और अनात्माका विवेकरूप कौशल तथा ख्यातिवादियोंमें विकल्प हूँ॥ २४॥✎ 1750
योगानामात्मसंरोधो मन्त्रोऽस्मि विजिगीषताम्।
आन्वीक्षिकी कौशलानां विकल्पः ख्यातिवादिनाम्॥ २४
आठ प्रकारके योगोंमें मैं मनोनिरोधरूप समाधि हूँ। विजयके इच्छुकोंमें रहनेवाला मैं मन्त्र (नीति) बल हूँ, कौशलोंमें आत्मा और अनात्माका विवेकरूप कौशल तथा ख्यातिवादियोंमें विकल्प हूँ॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)