॥ श्रीहरिः ॥
स्त्रीणां तु शतरूपाहं पुंसां स्वायम्भुवो मनुः।
नारायणो मुनीनां च कुमारो ब्रह्मचारिणाम्॥ २५
strīṇāṃ tu śatarūpāhaṃ puṃsāṃ svāyambhuvo manuḥ|
nārāyaṇo munīnāṃ ca kumāro brahmacāriṇām|| 25
अर्थ
मैं स्त्रियोंमें मनुपत्नी शतरूपा, पुरुषोंमें स्वायम्भुव मनु, मुनीश्वरोंमें नारायण और ब्रह्मचारियोंमें सनत्कुमार हूँ॥ २५॥✎ 1750
स्त्रीणां तु शतरूपाहं पुंसां स्वायम्भुवो मनुः।
नारायणो मुनीनां च कुमारो ब्रह्मचारिणाम्॥ २५
मैं स्त्रियोंमें मनुपत्नी शतरूपा, पुरुषोंमें स्वायम्भुव मनु, मुनीश्वरोंमें नारायण और ब्रह्मचारियोंमें सनत्कुमार हूँ॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1750 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-पुरुषोंमें) → महापुरुषोंमें)